अन्ना का वार- ((रिमोट कंट्रोल से चलते, लोकपाल से डरते हैं)) पीएम

पुणे. गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली टीम का हिस्सा अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे लोकपाल के दायरे में पीएम को लाए जाने के मुद्दे पर इसलिए चुप्पी साधे हुए हैं क्योंकि उनके ऊपर एक 'रिमोट कंट्रोल' काम कर रहा है जो उन्हें चलाता है। प्रधानमंत्री आज कुछ संपादकों के साथ होने वाली मुलाकात में इन आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ सकते हैं। हजारे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मैं नहीं मानता कि मनमोहन सिंह व्यक्तिगत तौर पर लोकपाल के दायरे में आने से डरते हैं। लेकिन उनके ऊपर एक रिमोट कंट्रोल काम कर रहा है। हाल ही में मैंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि वे लोकपाल के दायरे में क्यों नहीं आना चाहते। लेकिन प्रधानमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया। जब मैं उनसे मिला तो भी मैंने यही सवाल पूछा था। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।' हजारे ने कहा, 'मैंने उनसे पूछा था कि ऐसा इंसान जिसकी छवि साफ है और जिसके बारे में लोग अच्छी राय रखते हैं, वह लोकपाल के दायरे में क्यों नहीं आना चाहता है। उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।' हजारे ने एक बार फिर दोहराया कि वे लोकपाल बिल में शामिल पांच बिंदुओं पर समझौता नहीं करेंगे। इसमें प्रधानमंत्री, सभी सरकारी अफसरों, सीबीआई और विजिलेंस कमिशन को इस विधेयक के दायरे में लाए जाने की मांग की गई है। साथ ही अन्ना हजारे ने स्पष्ट किया है कि अगर मजबूत लोकपाल कानून नहीं बनता है तो वे 16 अगस्त से अनशन के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा है कि वे जंतर मंतर या जेल, जहां भी रहेंगे अनशन करेंगे। लोकपाल बिल के मुद्दे पर टीम अन्ना आज से राजनीतिक दलों से मुलाकात करने के लिए तैयार है। सिविल सोसाइटी ग्रुप ने करीब एक दर्जन राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखी है। आज से चार दिनों तक कई राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेताओं से सिविल सोसाइटी के सदस्य मुलाकात करेंगे। टीम सीपीएम के प्रकाश करात, राष्ट्रीय लोकदल के अजीत सिंह से बुधवार को मुलाकात करेगी। सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने का समय मांगा है। अरविंद केजरीवाल और पूर्व आईपीएस किरन बेदी पहले ही बीजेपी के नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात कर चुके हैं। सिविल सोसाइटी के सदस्य बीजेपी नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी से भी मुलाकात कर सकते हैं। टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल का कहना है कि टीम नीतीश कुमार से भी मुलाकात करेगी जो 30 जून को दिल्ली आ रहे हैं। उन्होंने बताया, 'टीम ने 14 राजनीतिक दलों को चिट्ठी लिखी थी, इसमें बीएसपी, एसपी, डीएमके, तेलुगूदेशम, एआईएडीएमके, आरजेडी, बीजेडी और तृणमूल कांग्रेश शामिल है। हम सभी पार्टियों को अपना प्रेजेंटेशन देंगे और उनके सामने अपना पक्ष रखेंगे। सभी राजनीतिक दलों को लोकपाल विधेयक पर सरकारी और सिविल सोसाइटी का ड्राफ्ट भी दिया जाएगा। साथ ही दोनों की तुलना करता हुआ एक चार्ट भी सभी पार्टियों को दिया जाएगा।' आपकी राय क्या वाकई प्रधानमंत्री रिमोट कंट्रोल से चल रहे हैं? क्या लोकपाल के मुद्दे पर उनकी खामोशी कई सवाल खड़े करती है? क्या अन्ना का यह सवाल सही है? इन मुद्दों पर अपनी राय संतुलित शब्दों में जाहिर करें। आप अपनी टिप्पणी के लिए जिम्मेदार होंगे।


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